Pithori Amavasya information in Hindi / पिठोरी अमावास्या कि जानकारी!

Pithori Amavasya information in Hindi / पिठोरी अमावास्या कि जानकारी!

Pithori Amavasya information in Hindi

पिठोरी अमावास्या का महत्व (Importance of Pithori Amavasya)

           पिठोरी अमावस्या व्रत का महत्व ओर उसके बारे मी सबसे पहिले माता पार्वती ने बताया था. उन्होने स्वर्ग लोक के देव राजा इंद्र कि पत्नी को सबसे पहिले बताया था. माता पार्वती ने बताया था कि इस व्रत को रखने से बच्चो को सुख समृद्धी मोलती है ओर वाह बहादूर बनते है.

पिठोरी अमावास्या कथा पूजा विधि(Pithori Amavsya katha, pooja vidhi in hindi)

          पिठोरी आमावस्या के दिन विवाहित महिला अपने बच्चो एव पती के लिये ये व्रत राखती है. यह त्योहार
उत्तरी भारत के कैलेंडर के अनुसार मानाय जाता है, देश के कूच जगह पर ऐसे सावन महिना का हि दिन माना जाता है आंध्रप्रदेश कर्नाटक, उडीसा एवं तमिळनाडू मे पिठोरी अमावास्या कहते है.

Pithori Amavasya information in Hindi

पिठोरी अमावास्या(Pithori Amavasya)

           पिठोरी आमावस्या के दिन सप्तमातृका कि पूजा कि जाती है. सप्तमातृका 7 दिव्य मातावो से मिलकर बनी है. जोशिव ओर शक्ती के द्वारा उत्पन्न हुई थी. सात देविओ के नाम
  1. ब्राह्मणी
  2. वैष्णवीं
  3. महेश्वरी
  4. कुमारी
  5. वाराही
  6. इंद्रायणी
  7. चामुंडी
          इन प्रत्यक देविओ के साथ कोई ना कोई किवंदती जुडी हुई है, जिसका उल्लेख कुरमा पुराण, वराह पुराण ओर महाभारत में भी किया गया है. भगवान शिव के द्वारा एक महान शक्ती योगेश्वरी को उत्पन्न किया गया था, जिसे सात देविओ के साथ आठवा स्थान मिला. पिठोरी आमावस्या के दिन ६४ योगिनी एवं सप्तमातृका कि पूजा कि जाती है.
          पिठोरी आमावस्या के दिन व्रत रखने से बच्चे स्वस्थ , एवं बुद्धिमान एवं बहादूर होते है. ओरते एक जगह मिलकर, तरह तरह का प्रसाद बनती है ओर फिर चढती है. पिठोरी आमावस्या के दिन काली रात होती है, लेकीन इस दिन असमान मी लाखो करोडो तारे छाये होते है. मनो इसा लगता है को असमान मी कोसी ने गेहू का आटा असमान मी उडा दिया है, ओर वो तारे के रूप मी दिखाई दे रहे है. एक यहीभी करणे है कि इसे पिठोरी अमावास्या कहते है.
Pithori Amavasya information in Hindi / पिठोरी अमावास्या कि जानकारी!

Pithori Amavasya information in Hindi

पिठोरी अमावास्या पूजा विधि(Pithori Amavsya pooja vidhi)

  • यह व्रत शादीशुदा ओरते, विशेषकर जिनके बच्चे होते है, वे मा ये व्रत रखती है.
  •  व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर, पवित्र नदी मी स्नान किया जाता है, फिर सूर्य को जल चढाया जाता है, रोज को पूजा को जाती है.
  • अमावास्या को पितरो का दिन कहा जाता है, इसिलये इस दिन पिंड दान एव दर्पण करे.
  • गरीबो एवं जरुरतमंदो को अन्य दान, छाता, चप्पल का दान करे.
  • हो सके तो पुरी सब्जी, एवं हलवा बनकर गरीबो मुख्य रूप से गरीब बच्चो को खिलाये
  • इस दिन वे 64 दिविओ को पूजा आराधना करते है. उनसे अपने बच्चो एव परिवार के खुश्हाली कि प्राथना करते है, लांबी आयु कि प्राथना कि जाती है. उसे हिंदू मान्यता के अनुसार हिन्दुओ के 35 करोड दिवी देवताओ होते है.
  • पीठ मतलब आठा होता है, जिसे खाकर मनुष्य को जिवन मिलता है, वो अपना पेठ भरता है. इसी आठे का हमारे जीवन मी बहुत महत्त्व होता है.
  • इसी आठे से 64 दिविओ कि प्रतिमा बनाई जाती है, ओर फिर उसकी पूजा कि जाती है. इन्हे अपने इच्छा नुसार छोटा या बडा बनाया बना सकते है. इन्हे जाहे तो कलर कर भी सकते है, एवं वस्त्र पाह्नाये.
  • कुच क्षेत्रो मी देवी दुर्गा को योगिनी के रूप मी पूजा जाता है. इसिलीया पीठ हर एक योगिनी को दर्शाता है. इसी तरह 64 योगिनी है, जिनकी पूजा कि जाती है.
  • इन सब 64 देवी कि प्रतिमाओ कि एक साथ एक जगह, किसी चोकी या किसी पटे पर रखा जाता है.
  • जेवर पहनाने के लिये, बेसन को गुथकर आटा तयार करे. अब इससे गले कि माग टीका, चुडी, कान के बाले बनाकर देवी को पहनाये.
  • फुलो से पूजा वाले स्थान को सजाये, देविओ के प्रतिमा के उपर फुलो का छत्र बनाये.
  • पूजा मी प्रसाद के लिये पकवान बनाये जाते है, पूरम पोली, गुझिया, शंकर पारे, मीठे गुड के शंकर पारे, मठरी, बनाई जाती है.
  • कई लोग अपने घर मी अलग से पूजा नही करते है, मोहल्ले मी एक जगह इकठ्ठा होकर पूजा करते है.
  • शाम को इसकी पूजा होती है, देवी के प्रतिमा को सुहाग का समान चढाया जाता है. साडी ब्लाउज चढाया जाता है.
  • पुरी विधि वधान से पूजा करणे के बाद आरती कि जाती है, फिर पंडित जी कि प्रसाद के तोर पर पकवान दिये जाते है. अपने से बडे को पकवान देकर पैर छुये जाते है.

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