Pola Festival information In Hindi / पोळा त्योहार कि जानकारी हिंदी मे!

Pola Festival information In Hindi / पोळा त्योहार कि जानकारी हिंदी मे!

           भारत एक कृषी प्रधान देश है. यहाँ कृषी को अच्छा बनाने मी मावेशियो का भी योगदान है.
भारत देश मी इन मावेशियो कि पूजा कि जाती है. पोळा त्योहार उन्ही मी एक है, जिस दिन कृषक गाय बैल
कि पूजा करते है. यह पोळा त्योहार विशेष रूप से छत्तीसगड,मध्यप्रदेश एव महाराष्ट्र मी मानाय जाता है.
पोळा के दिन किसान ओर अन्य लोग पशु यो कि विशेष रूप से बैल कि पूजा करते है. उन्हे अच्छे से सजाते है.
पोळा बैल पोळा भी कहा जाता है.

2018 मी पोळा त्योहार कब है (pola festival date in 2018)

           पोळा का त्योहार भाद्रपद महा कि आमवस्या को जिसे पिठोरी आमवस्या भी कहा जाता है, उस दिन
मानाय जाता है, यह त्योहारअगस्त – सितम्बर महिने मी आता है. यह साल यह त्योहार 9 सितम्बर 2018 
दिन रविवार को मानाय जायेगा. महाराष्ट्र मे इस त्योहार को बडी धूमधाम से मानाय जाता है, विशेष तोर पर विधर्भ ओर मराठवाडा क्षेत्र मे इस्की बडी धूम राहती है. वाह ये त्योहार दो दिन तक मानाय जाता है, वहा बैल पोळा को मोठा पोळा कहते है, इसके दुसरे दिन को तनहा पोळा कहते है.

पोळा त्योहार का महत्व (Importance of pala festival)

           भारत जहा कृषी आय का मुख्य श्रोत है याह जदातर किसानो कि खेती के लिये बैल का प्रोयोग 
किया जाता है. इसलिये किसान पशु ओ कि पूजा आराधना एव उनके धन्यवाद देणे के लिये इस त्योहार को मानते है 
          पोळा दो तरह मानाय जाता है, बडा पोळा एव छोटा पोळा. बडा पोळा जिसमे बैल को साजाकर उनकि पूजा कि जाती है, जबकी छोटे पोळा मी बच्चो खिलोने कि बैल या घोडे मोहल्ले पडोस मी घर घर ले जाते ओर फिर कूच पैसे या गिफ्ट उन्हे दिया जाता है

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पोला नाम क्यो पडा (What is the name pola)

          विष्णू भगवान जब कान्हा के रूप में धरती में आये थे, कृष्ण जन्माष्टमी के रूप से मानाय जाता है. तब जन्म से हि उनके कसं मामा उनके जान के दुश्मन बने हुये थे. कान्हा जब छोटे थे ओर वासुदेव यशोदा के याह राहते थे तब कंस ने कैई बर कैई असुरो को उन्हे मारणे भेजा था.एक बर कंस बे पोलासुर नामक असुर को भेजा था, इसे भी कृष्ण ने अपने लीला के चलते मार दिया था, ओर सबको अचंभित कर दिया था. वह दिन भाद्रपद का महा कि आमवस्या का दिन था, इस दिन से इसे पोला कहा जाने लागा.  
Pola Festival information In Hindi

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मध्यप्रदेश एव छत्तीसगड मे पोळा त्योहार मानाने का तरीखा(Mode of celebrating Pola festival in Madhya Pradesh and Chhattisgarh)

          मध्यप्रदेश एव छत्तीसगड बहुत हि आदीवासी जाती एव जनजाती रहती है.याह के गाव मी पोळा का त्योहार बडी धूम धाम से मानाय जाता है. यहाँ सही बैल कि जगह लाकडी एव लोहे कि पूजा कि जाती है, बैल के
अलावा यहाँ लकडी, पतली घोडे कि भी पूजा कि जाती है.
  • इस दिन घोडे बैल के साथ साथ चक्की(हाथ से चलाने वाली चक्की) कि भी पूजा कि जाती है.पहले के जमाने मे घोडे बैल, जीवन को चलाने मे मुख्य मुख्य होते थे, एव चक्की द्वरा हि घरपर गेहू पिसा जाता है.
  • तरह तरह के पकवान चढाये जाता है, सेव, गुझिया मीठे खुरमे आदि बनाये जाते है.
  • घोडे के उपर थैली रखकर उसमे ये पकवान रखे जाते है.
  • फिर अगले दिन सुबह ये घोडे, बैल को लेकर बच्चे मोहल्ले पडोस मे घर घर जाते है. सबसे ओर      उपहार के पैसे लेते है.
  • इसके आलाव पोळे के दिन मध्यप्रदेश एव छत्तीसगड मे गेडी का जुलूस निकाला जाता है. गेडी बास से बनाया जाता है, जिसमे एक लांब बास में नीचे 1-2 फीत आडा करके छोटा बास लागाय जाता है. फिर इसपर बलैंस करके खडा हो जाता है. खडे होकर चला जाता है. गेडी काई साईज कि बनाई जाती है. जिसमे बच्चे, बडे सभी चढकर हिस्सा लेते है. ये एक तरह का खेळ है, जो मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगड का पारंपारिक खेळ है भारत के अन्य क्षत्रो में तो इस जाणते भी नही होंगे.

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महाराष्ट्र में पोला बनाने का तरीका(pola festival celebration in Maharashtra)

  •  महाराष्ट्र पोला सबसे जादा मानाने जाने वला त्योहार है
  • महाराष्ट्र में पोळे के पहिले दिन बैल, ओर सभीजानवर को नाहलाया जाता है.
  • उसके बाद पोले के पहिले दिन शाम को उनको पोळी/रोटी खिलाई जाती है.
  • फिर पोले के दिन फिरसे उनको नाहलाया  जाता है अगर पास मे कोई तलाब, नदी होता है तो उन्हे वहा जाकर नाहलाया जाता है, ओर उनको खूब खिलाया जाता है
  • पोले के दिन बैल से कूच भी काम कारवाया नही जाता
  • इसके बाद बैल को अच्छे से सजाया जाता है, ओर उनके शिंग को कलर लागाय जाता है.
  • उन्हें रंगबेरंगी कपडे पाह्नाये जाते है, तरह तरह के जेवर, फुलो कि मला पाहणाते है, शाल उढाते              है.
  • इस दिन का मुख्य उद्देश यह है कि बैल के सिंग मे बांधी पुराणी रस्सी को बदलकर नये तरीके सी बांधी जाता है.
  • गाव के सभी लोग एक जगह एकाठ्ठे होते है, ओर अपने अपने बैल को सजाकर लाते है. इस दिन सबको अपने बैल को दिखाने का मोका मिलता है.
  • फिर इन सबकी पूजा करके पुरे गाव मी डोल, नगाडे के साथ इनका जुलूस निकाला जाता है.
  • इस दिन घर मे विशेष तरह के पकवान बनाये जाते है, इस दिन पूरम पोली, गुझिया, वेजिटेबल करी एवं पाच तरह को सब्जी मिलकर मिक्स सब्जी बनाई जाती है.

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